रुठ
जा़ऊँ मैं l
पुरी
तरह l
रुठ
जाऊँ मैं l
पक्का
ll
अच्छा
चल l
रुठ
ग़ई मैँ l
अब
आकर l
मना़
मुझे ll
पक्का
l
म़नाएगी
ना?
तेरी
म़र्जी l
तेरी
हुकुम़त l
तेरी
सोच l
तेरी
ख्वाहिंशे l
अब
तक इन पगडंडियों पर
l
दौड़
रही हूँ मैं ll
पक्का
l
दौड़
रही हूँ मेँ ll
ऐ
जिंदगी
कभी
तो ऐसा हो
मेरी
ख्वाहिंशों पर
तू
दौडे़
मेरी
हुकुम़त पर
तू
नाचे
मेरी
सोच पर
तू
इन्कार न करें
मेरी
रुठी राह
तू
संवारे
पक्का
l
ऐ
जिंदगी
कभी
तो ऐसा हो
....कभी
तो ऐसा हो
मृदुला.
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