हसीं लम्हे ठहाके जोरो के
छीनी मुस्कुराहटें गुजरते वक़्त ने
कुछ गलतिया मैंने भी की थी
नजरअंदाज़ बोहोतों ने की थी
बरी तो मैंने तुमको कबका कर दिया
गिला तो दिल मे कुछ नहीं रखा
कुछ यादे तुमसे ऐसी गढ़ी हैं
जब भी लिखू जिक्र हो जाता हैं
कमाल के होते हैं वो लोग
दर्द भी सहते हैं और जिक्र भी नहीं करते
दूसरों के लिए आसान नहीं जनाब जलना
खुद को जल जाना पड़ता हैं
पहले जब हम मिलते थे मुस्कुराते थे
अब जब वो ही नहीं आँसू निकल आते हैं
किस्मत कुछ ऐसी थी मिल गए तुम सही वक़्त पर
न मिलते गर न जाने जिंदगी होती किस मोड़ पर
फ़िक्र हैं मुझे कहता नहीं हूँ
मेरे हर करम में तेरा भला चाहता हूँ
प्यार का इजहार जुबा ने न किया था
मगर आखों ने बतला दिया था
अधूरे ही सही रिश्ते तो थे
धुंदली ही सही यादे तो है
दुनिया कहती हैं तुम खो गए हो
एहसास मेरा हैं तुम मेरे पास हो
निभाने की चाहत तो बहोत थी
छोड़ जाने वालों की कमी न थी
कहाँ ठहरा था वो मेरे लिए
साया बनके रुका तो नहीं मेरे लिए
नसीब से बेवजह मत उलझिए साहब
नसीब से कम या ज़्यादा किसीको नहीं मिलता
दस्तक अवसर की सुन न पाए
मौकापरस्त बन न पाए
कोई दोस्त गैर न था मगर
तनहाई में हर शाम साथ निभाती थी
उलझी जिंदगी मकड़ी के जालमें
खोया सुकूँ सपनोंको सवारने में
होशियारी ने नादानी खो दी
रंगीं जिंदगी बेरंग हो गयी
वक़्त बढ़ता रहा लोग छूटते गए
आखों के आँसू सिमट से गए
चंद घडिया सिमटकर रखी थी सीने में
बिखरने का उनके वक़्त आ गया हैं
अमोल पाटखेड़कर
०२-मार्च-२०२४