Friday, 23 August 2019

कोण आहेस तू?


   धांगडधिंगा, लीला करणारा बाळकृष्ण?
   चोरुन लोणी खाणारा खट्याळ नंदलाल?
    कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

 मंत्रमुग्ध बासरी वादन करणारा राधेकृष्ण?
 नंदाघरच्या गाई हाकणारा गोपालकृष्ण?
   कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

     मित्रांचाही परम मित्र 
     पतितांचा स्वामी
   कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

       कंसाचा प्राणारी
       राधेचा मुरारी
  कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

     कालियाचा कर्दनकाळ
      दुष्टांचा विनाशकाल 
  कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

     राधेचा जिवलग सखा
     मीरेचा ध्यास अनोखा
   कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

    भोगविलासी भोगी की
     निष्काम कर्मयोगी?
   कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

   गीता सांगणारा तत्त्वज्ञानी?
   मुकुंद नावाचा मोक्षदानी?
 कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

     देवकीचा नारायण
     यशोदेचा नंदलाल
   कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

    हजारो स्रियांचा तारणहार
    कैक जनांचा केला उध्दार
   कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

   मनामनांत प्रेम, समर्पण, त्याग, विश्वास
    वसवू पाहणारा अंतरीचा कृष्ण?
   बासरीआडून अवखळ मंद हास्य
   ओठी ल्यालेला मौन कृष्ण?
    मौन आहेस तू?
  कृष्णा, सांग ना? कोण आहेस तू?

   मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.
      २३ अॉगस्ट २०१९.

श्रीकृष्णा


तुझिया चरणांवरती
   सहजचि झुकला माथा
   सुखी ठेव सर्वांना
   ठेव बाजूला सर्व व्यथा

  ऋणानुबंधाची की जन्म-जन्मांतरीची
    ओढतोस तू रेषा
   परतो, अथवा जावो दिगंती
    चिवट मानवी जिजिविषा

   वाटते तितकी सोपी नसते
    भगवंत भक्तीची माया
   सदासर्वदा लाभो सर्वा
     तव मायेची छाया

   मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.
    २३ अॉगस्ट २०१९.

Wednesday, 21 August 2019

कैदी है यहाँ हर कोई


     सपनों का कोई
     इच्छाओं का कोई
    कैदी है यहाँ हर कोई
     
     रंगों का कोई
    लिवाज का कोई
    कैदी है यहाँ हर कोई
   
   मनचाही उडा़न का कोई
  सागर में छिपे मोती सा कोई
    कैदी है यहाँ हर कोई
    
    जिंदगी की साँसों का कोई
    दिल की आवाज का कोई
     कैदी है यहाँ हर कोई
   
   .....कैदी है यहाँ हर कोई

    .....मृदुला
       २१ अॉगस्ट २०१९.

Monday, 5 August 2019

रुठ जा़ऊँ मैं


रुठ जा़ऊँ मैं l
   पुरी तरह l
   रुठ जाऊँ मैं l
   पक्का ll

    अच्छा चल l
    रुठ ग़ई मैँ
    अब आकर l
    मना़ मुझे ll
     पक्का l
   म़नाएगी ना

   तेरी म़र्जी l
   तेरी हुकुम़त l
   तेरी सोच l
   तेरी ख्वाहिंशे l
  अब तक इन पगडंडियों पर l
    दौड़ रही हूँ मैं ll
    पक्का l
   दौड़ रही हूँ मेँ ll

    जिंदगी
    कभी तो ऐसा हो
    मेरी ख्वाहिंशों पर
    तू दौडे़
   मेरी हुकुम़त पर
    तू नाचे
   मेरी सोच पर
   तू इन्कार करें 
   मेरी रुठी राह
     तू संवारे
      पक्का l
    जिंदगी
    कभी तो ऐसा हो

  ....कभी तो ऐसा हो 

    मृदुला.