मेरे
हिस्से
में
तू
कितनी???
ये
तो
मुझे
मालूम
नहीं
....लेकिन....जितनी भी तू मिले....
प्यार
की
गहराईयाँ
दामन
छू
ले
वफा
से
रिश्तेदारी
मुठ्ठी
पकड
ले
अस्मानी
ऊंचाई
आँचल
में
समा
ले
जिंदगी......!!!!
मेरे
हिस्से
में
तू
कितनी???
ये
तो
मुझे
मालूम
नहीं
....लेकिन....जितनी भी तू मिले....
बैर,
दबोच
से
छुटकारा
मिले
कोसों
दूर
रहकर
भी
कोसा
हमें
किसीने
दुःख
दिया,
दर्द
दिया
किसीने
फिर
भी.....
उन्हें
राह
में
राहत
मिले
वक्त
का
पहिया
चाहे
कैसा
भी
चले...
तू
न
बदलेगी
कभी...और ना कभी
तेरी
फितरत
बदले
जिंदगी......!!!!
मेरे
हिस्से
में
तू
कितनी???
ये
तो
मुझे
मालूम
नहीं
....लेकिन....जितनी भी तू मिले....
कोशिश
से
कामयाबी
तक
चले
चाहे
कितनी
बार
हार
मिले
फिर
भी.....जीत की ओर कदम चले
अपनों
से
अपनापन
मिले
दोस्ती
की
ना
दिवार
टूटे
मन
के
उजालों
का...
ना
कभी
सूरज
ढले
जिंदगी......!!!!
मेरे
हिस्से
में
तू
कितनी???
ये
तो
मुझे
मालूम
नहीं
....लेकिन....जितनी भी तू मिले....
ऐसी
ही
तू
चलती
चले
उम्र
के
साथ
साथ.....
बढते
बढते
खुशियाँ
मिले....
जिंदगी......!!!!
मेरे
हिस्से
में
तू
कितनी???
ये
तो
मुझे
मालूम
नहीं
....लेकिन....जितनी भी तू मिले...
जितनी
भी
तू
मिले....
मृदुला
मुकुंद
पाटखेडकर.
२
जुलै
२०१७.
No comments:
Post a Comment