Friday, 2 July 2021

बुँद बुँद बारिश

 बुँद बुँद बारिश आती है

  सबके लिए आनंद लाती है

  इस आनंद में मै हूँ

 

  सुबह सुबह सूरज की

  उजली उजली किरण आती है

  सबके लिए चेतना लाती है

    इस चेतना में मै हूँ


   शब्द शब्द का संगठन

  भावनाओं की कहानी कहे

   हर एक भावना में छुपी हुई

   एक भावना मै हूँ


    कवी हूँ मै

  भावनाओं के सागर में रहती हूँ

   कविता ही मेरा प्राण

   कविता ही मेरा आत्मजागर

   कविता ही मेरे दिल की खोज

   शब्द और शब्द से जुडे

    सुकून में मै हूँ


   जब भी आये याद मेरी

   इन शब्दों में मुझे ढुँढना

   आमने सामने चाहे न मिल सकूँ

   शब्दों की गहराईयों में मुझसे मिलना

   शब्दों की कहानी, भावना की जुबानी

    अरुप के रुप में मै हूँ


   उम्र की दहलीज पर

   सांझ कभी न आये

   दिल के उजाले में मेरे

   अंधेरा कभी न छाये

   ढाई आखर प्रेम का और

  आशिष सभी प्रियजनों का मिले

  खुद ही से खुद ही यही दुवा माँगू

     सदा सुख में हमेशा मै रहूँ


    मृदुला मुकुंद पाटखेडकर 

       २ जुलै २०२१

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