याद और इंतजार
दोनों तडपाते बहोत है
याद बीते दिनों की
और इंतजार आनेवाले कल का
राही, चलता चल हरपल
कल और आज में पल पल
मृदुला मुकुंद पाटखेडकर
३१ जुलै २०२२
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