Saturday, 30 July 2022

रात भी बाकी दिन भी बाकी











रात भी बाकी

दिन भी बाकी

उजाले की ओर है आशा

रात में भी नहीं थी निराशा

मिठास में है अपनापन

जीवन में है नयापन

बाकी में है बात अधुरी

संपूर्णता से है अधुरी यारी

कहानीं यही है जिंदगी की सारी

दिन और रात हर हमेशा से ही

तराशते है जोहरी

रात भी बाकी

दिन भी बाकी


  मृदुला मुकुंद पाटखेडकर 

  ३१ जुलै २०२२

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