Thursday, 28 July 2022

गाँव का घर









यादों की दिलेरी में गाँव का घर कहीं ना कहीं

वापसी के लिए मुसाफिर पैर निकलेगा नहीं

चाहे छोटासा घर ही है वहां सही

अपनेपन का एहसास कहीं और मिलेगा नहीं

घर तो आखिर घर ही होता है, खुशी खजाना यहीं

दिल की बात, रुहानीं जज्बा कहीं और नहीं

यादों की दिलेरी में गाँव का घर कहीं ना कहीं


     मृदुला मुकुंद पाटखेडकर 

     २८ जुलै २०२२

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