मरहूम इस दिल में
कोई शमा; जला अब उमंग नहीं सकती
तूने ठुकराया हैं
किसी दूसरीको; जगा अब मिल नहीं सकती
तसव्वुर में
ही अब तुम्हारी जुस्तजू कर सकते हैं
और इसी तराह से इस फ़िराक-ए-मजरूह दिल में
तुम्हे पाबन्द कर सकते हैं
इस फुवाद में
तुमसे गुफ्तगू करने के सारे रास्ते बंद हैं
और एक हम हैं
जो फिर भी तब्दील की आस लगाए बैठे हैं
इस कदर तासीर हुआ हैं
कहर तुम्हारी मोहब्बत का इस दिल में
ना जी सकते हैं
ना मर सकते हैं
खुश नसीब हैं
वो लोग जिनकी बंदगी रंग लायी
और एक हम बेकार हैं
जिसकी परस्तिश कभी काम ना आयी
खुश नसीब हैं
वो लोग जिनकी मोहब्बत बुज़ुर्ग हुई
और एक हम बद नसीब हैं
जिसकी कभी जवां नहीं हुई
हसरत पे हमारी ज़माने को भी रोना आया
काफिला साथ फिर भी हमने खुदको तनहा पाया
ये मोहब्बत का नशा इस कदर हमें दूर लाया
की सामने हमने मज़ार पाया
की सामने हमने मज़ार पाया
अमोल पाटखेडकर
०३-नोव्हेंबर-२०२२
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