दोस्तों
के
साथ
हो,
तो
गप्पे
हो
जाती
है
रिश्तेदारों
के
साथ
हो
तो
घर
के
मसले
हल
हो
जाते
है
माँ
बाप
के
साथ
हो
तो
दर्द
भी
मिठा
लगने
लगता
है
चाय
के
साथ...
चाहत
का
रंग
भी
खिल
उठता
है
ऑफिस
की
टेबल
पर
हो
तो
फाइलें
निपट
जाती
है
महबूबा
के
साथ
हो
तो
घूँट
से
घूँट
मिलकर
एक
दुजे
में
घुलमिल
जाती
है
प्यार
में
मिठास
लाती
है
दिनभर
की
चिंता,
पीडा
और
थकान
दूर
करती
है...
ऐसा
ही
खूब
करिष्मा
दिखाती
है
तो
दोस्तों.....
रिश्तेदारों.....
हो
ज्जाय
सबके
लिए.....
एक
प्याली
प्यारवाली
चाय.....
No comments:
Post a Comment