Sunday, 16 April 2017

एक प्याली चाय


दोस्तों के साथ हो, तो गप्पे हो जाती है

 
एक प्याली चाय

रिश्तेदारों के साथ हो तो घर के मसले हल हो जाते है

 
एक प्याली चाय

माँ बाप के साथ हो तो

दर्द भी मिठा लगने लगता है

चाय के साथ...

चाहत का रंग भी खिल उठता है

 
एक प्याली चाय

ऑफिस की टेबल पर हो तो फाइलें निपट जाती है

 
एक प्याली चाय

महबूबा के साथ हो तो

घूँट से घूँट मिलकर

एक दुजे में घुलमिल जाती है

प्यार में मिठास लाती है

 
एक प्याली चाय

दिनभर की चिंता, पीडा और थकान

दूर करती है...

 
एक प्याली चाय

ऐसा ही खूब करिष्मा दिखाती है

तो दोस्तों..... रिश्तेदारों.....

हो ज्जाय सबके लिए.....

एक प्याली प्यारवाली चाय.....

 मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.
१६//२०१७.

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