ऐ
दिल,
यही
तमन्ना
मेरी
दर्पण
की
तरह
रहूँ
मैं
साफ़
सुथ़री
न
बैरभाव
हो
न
कटुता
हो
न
कोई
द्वेष
हो
न
कोई
मत्सर
हो
ऐ
दिल,
यही
तमन्ना
मेरी
दर्पण
की
तरह
रहूँ
मैं
साफ़
सुथ़री
असत्य
की
दलदल
में
सत्य
की
उजली़
किरण
हो
स्थिर
हो
मन
शांत
हो
मन
न
हो
मन
में
कोई
खलबली
ऐ
दिल,
यही
तमन्ना
मेरी
दर्पण
की
तरह
रहूँ
मैं
साफ़
सुथ़री
चरित्र
पवित्र
आचरण
शुध्द
अंतःकरण
हो
करुणाम़यी
ऐ
दिल,
यही
तमन्ना
मेरी
दर्पण
की
तरह
रहूँ
मैं
साफ़
सुथ़री
आशाओं
की
झाँकी
हो
निराशा
न
कोई
बाकी
हो
प्रगती
के
पथ़
चलूँ
हमे़शा
हरपल
खुश
रहूँ
हमे़शा
ऐ
दिल,
यही
तमन्ना
मेरी
दर्पण
की
तरह
रहूँ
मैं
साफ़
सुथ़री
प्यार
बाँटती
रहूँ
अपनों
के
संग
झूमती
रहूँ
न
मनमुटाव
हो
न
मन
में
कोई
मैल
हो
ऐ
दिल,
यही
तमन्ना
मेरी
दर्पण
की
तरह
रहूँ
मैं
साफ़
सुथ़री
किताब
रहे
मन
की
खुली
खुली,
खिली
खिली
न
इसमें
कोई
राज़
छिपा
हो
दिखावे
का
न
हो
भवंडर
स्पष्टता
हो
उजा़गर
ऐ
दिल,
यही
तमन्ना
मेरी
दर्पण
की
तरह
रहूँ
मैं
साफ़
सुथ़री
दिल
से
निभाऊँ
रिश्ते
मन
में
जगाऊँ
फरिश्ते
याद
मुझे
कोई
करे
या
न
करे
यादों
का
लिहाफ़
जोडती
जाऊँ
मैं
ऐ
दिल,
यही
तमन्ना
मेरी
दर्पण
की
तरह
रहूँ
मैं
साफ़
सुथ़री
ऐ
दिल,
यही
तमन्ना
मेरी
दर्पण
की
तरह
रहूँ
मैं
साफ़
सुथ़री
मृदुला
मुकुंद
पाटखेडकर.
२७/८/२०१७.
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