Sunday, 27 August 2017

तमन्ना, आईना और मैं.....


दिल, यही तमन्ना मेरी

दर्पण की तरह रहूँ मैं साफ़ सुथ़री

 

बैरभाव हो

कटुता हो

कोई द्वेष हो

कोई मत्सर हो

 

दिल, यही तमन्ना मेरी

दर्पण की तरह रहूँ मैं साफ़ सुथ़री

 

असत्य की दलदल में

सत्य की उजली़ किरण हो

स्थिर हो मन

शांत हो मन

हो मन में कोई खलबली

 

दिल, यही तमन्ना मेरी

दर्पण की तरह रहूँ मैं साफ़ सुथ़री

 

चरित्र पवित्र

आचरण शुध्द

अंतःकरण हो करुणाम़यी

 

दिल, यही तमन्ना मेरी

दर्पण की तरह रहूँ मैं साफ़ सुथ़री

 

आशाओं की झाँकी हो

निराशा कोई बाकी हो

प्रगती के पथ़ चलूँ हमे़शा

हरपल खुश रहूँ हमे़शा

 

दिल, यही तमन्ना मेरी

दर्पण की तरह रहूँ मैं साफ़ सुथ़री

 

प्यार बाँटती रहूँ

अपनों के संग झूमती रहूँ

मनमुटाव हो

मन में कोई मैल हो

 

दिल, यही तमन्ना मेरी

दर्पण की तरह रहूँ मैं साफ़ सुथ़री

 

किताब रहे मन की

खुली खुली, खिली खिली

इसमें कोई राज़ छिपा हो

दिखावे का हो भवंडर

स्पष्टता हो उजा़गर

 

दिल, यही तमन्ना मेरी

दर्पण की तरह रहूँ मैं साफ़ सुथ़री

 

दिल से निभाऊँ रिश्ते

मन में जगाऊँ फरिश्ते

याद मुझे कोई करे या करे

यादों का लिहाफ़ जोडती जाऊँ मैं

 

दिल, यही तमन्ना मेरी

दर्पण की तरह रहूँ मैं साफ़ सुथ़री

 

दिल, यही तमन्ना मेरी

दर्पण की तरह रहूँ मैं साफ़ सुथ़री

 

 

मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.

२७//२०१७.

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