सबकुछ चाहिए मुझे
धूप भी छांव भी
बादल भी बरसात भी
समंदर की तैरती लहरें भी
सुरज का उजाला भी
मन के आसमान में
उंची उडान भरनेवाला पंछी भी
मृदुला मुकुंद पाटखेडकर
१४/८/२०२२
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