Saturday, 13 August 2022

सबकुछ चाहिए मुझे


 










सबकुछ चाहिए मुझे

धूप भी छांव भी

बादल भी बरसात भी

समंदर की तैरती लहरें भी

सुरज का उजाला भी

मन के आसमान में 

उंची उडान भरनेवाला पंछी भी

सबकुछ चाहिए मुझे


  मृदुला मुकुंद पाटखेडकर 

    १४/८/२०२२

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