Wednesday, 3 August 2022

मेरी रचना



   








वल्ला जवाब तुम्हारा नहीं


   किसी भी मौसम में सुनूँ 

   तो बहार है

   तेरी गायकी का जुनून

   सारे जहाँ पे सवार है

   नजा़कत भी है

   शरारत भी है

   बचपना भी है

   सागर जैसी गहराई है

   रात में गूँजती तनहाई भी है

   जादूभरी मदहोशी भी है

  दिल की धडकनों में ठहरती जैसे

   आवाज मस्तानी तेरी 

   अलग हरकतें तेरी

   दुनिया के दिलों का कत़रा कत़रा 

   छूती हो जैसे

  हर लम्हा़ नई पेशकश लगती हो जैसे

   सूरमयी साज़ में सजी़

   सुंदर गायकी तेरी किशोरदा!!!!

   सात सूरों को अमर बनाती हो जैसे

    

       मृदुला मुकुंद पाटखेडकर. 

          ४/८/२०२२

     महान गायक किशोर कुमार यांच्या जयंतीनिमित्त.

No comments:

Post a Comment