Tuesday, 2 August 2022

कोई तो यहाँ से गुजरे

 कोई तो यहाँ से गुजरे

  प्रेम का पथ बरसाये





 







कोई तो यहाँ से गुजरे

इंतजार में तरसाये


 कोई तो यहाँ से गुजरे

 जो दिल से याद आये


 कोई तो यहाँ से गुजरे

 सावन का रंग चढाये


 कोई तो यहाँ से गुजरे

 झूम के झुलों के गीत गाये


 कोई तो यहाँ से गुजरे

 सावन की कहानी कहलाए


   मृदुला मुकुंद पाटखेडकर 

    ३/८/२०२२

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