वल्ला
जवाब
तुम्हारा
नहीं
किसी
भी
मौसम
में
सुनूँ
तो
बहार
है
तेरी
गायकी
का
जुनून
सारे
जहाँ
पे
सवार
है
नजा़कत
भी
है
शरारत
भी
है
बचपना
भी
है
सागर
जैसी
गहराई
है
रात
में
गूँजती
तनहाई
भी
है
जादूभरी
मदहोशी
भी
है
दिल
की
धडकनों
में
ठहरती
जैसे
आवाज
मस्तानी
तेरी
अलग
हरकतें
तेरी
दुनिया
के
दिलों
का
कत़रा
कत़रा
छूती
हो
जैसे
हर
लम्हा़
नई
पेशकश
लगती
हो
जैसे
सूरमयी
साज़
में
सजी़
सुंदर
गायकी
तेरी
किशोरदा!!!!
सात
सूरों
को
अमर
बनाती
हो
जैसे
मृदुला
मुकुंद
पाटखेडकर.
१३
अॉक्टोबर
२०१७.
किशोर
कुमार
स्मृतिदिन.
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