Monday, 7 November 2016

अंदर की आवाज

     दिल, हमेशा, हमेशा, हमेशा ही
    अंदर की आवाज को टटोल तू

     चाहे कितनी भी मुसीबतें आये
     चाहे मन कितना भी पडे़ दुविधा में
     इस दिल में झांककर फै़सला कर तू

      बाहर की आवाज को हमेशा ही
          सुनता रहा तू
       इसने ये कहा मान लिया
       उसने वो कहा सुन लिया
     ॲऔर किसीने और कुछ कुछ कहा
        वो भी कुछ कुछ मान लिया
       दिल के फै़सलों को कभी तो
         बाहर निकाल तू
      दिल, हमेशा, हमेशा, हमेशा ही
      अंदर की आवाज को टटोल तू

       इस शोर भरी दुनिया में
       तेरी आवाज खो जाये
       सब करते अपनी मनमानी
       बढा चढाके कहते हैं झूठ को
       रो रो के बताते हैं झूठ को
       एकदम सच्चाई की तरह
       नौटंकी भरी इस दुनिया में
     मन को तेरे हमेशा साफ़ रख तू
       दिल, हमेशा, हमेशा, हमेशा ही
        अंदर की आवाज को टटोल तू

        जब करेगा तू दिल से फै़सला
        दिल में बना रहेगा हौसला
          फिर कभी टूटेगा.....
         सच्चाई, ईमान, और
          विश्वास का खोंसला
     ये बात आज, अभी से जान ले तू
     दिल, हमेशा, हमेशा, हमेशा ही
      अंदर की आवाज को टटोल तू

   मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.

       नोव्हेंबर २०१६.

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