Wednesday, 9 November 2016

पैसा बोलता है

    कल रात सपने में अचानक वो आयी
  खुश देखकर उसे मै कुछ समझ पायी
   बदल रहा है अब रुप और रंग मेरा
  गुलाबी गुलाबी निखर रहा है रुप मेरा
   वहीं वहीं रंग और रुप की दुनिया में
   काला धन मुझे बनाकर छुपाया है
    कई महाधनों ने, बुरे बुरे, काले इरादोंने
   गुप्त किया है मुझे घर के किसी कोने में
  आज बाहर निकलेगा वो सारा काला धन
  जिन्होने उसे छुपाया है बंद तिजोरीयों में
   पाँच सौ और हजार की वो नोट थी
   जो कल रात मुझे सपने में दिखी थी
  उसके साथ वो एक बडे़ अमीर को लायी
      जिसने अपनी पूरी जिंदगी
     काला धन कमाने में  लगायी
      बोल रही थी उसके साथ
     पाँच सौ और हजार की पुरानी नोट
     बोली वो अब बात मेरी सुन तू
       बात मेरी अब मान ले तू
     जिन्होने कमाया मुझे सच्चाई और
   ईमानदारी से, मेहनत का पसीना बहाया
    खूब अच्छा काम करके मुझे कमाया
  उन सभी को आज मैने शांत नींद में पाया
 
     देखते है मेरा नया रुप क्या क्या
   रंग लायेगा, क्या क्या रुप दिखायेगा
    सुना है मैने ये की जब दो हजार के
     नये रुप में मै जब आऊँगी
   satellite signal द्वारा काला धन
     सबके सामने लाऊँगी
    अच्छे अच्छों की बोलती अब मै
       बंद करुँगी
    सच्चाई के साथ हमेशा अब मैं चलना
     और बोलना पसंद करुँगी
   मोदी का निर्णय अब क्या कमाल लाया
   सारे भारत ने आज मेरा ही विचार किया

    बोली पुरानी नोट फिरसे उस अमीर
      आदमी से;
       लक्ष्मी का रुप हूँ मै
      मेरा हमेशा स्वागत कर
     अच्छाई के पथ पर चलकर
      बुराईयों का विनाश कर
     जो हो गया सो हो गया
     अब नये रुप में मेरा स्वागत कर
       छोड दे अब ये कालापन
       छोड दे अब ये बेईमानी
       इतना कहा जब नोट ने
       सपना मेरा टूट गया
      मन ही मन में लगा आज ये
     सूरज भी कुछ अलग नजर आया
      पुरानी नोटों को आज दिल से
     हमेशा के लिए, मुस्कुराहट के साथ
      Bye.....Bye... किया
      दिल थामकर कहा उनसे
      कभी साथ दिया बहुत आपने
      इसलिए... शुक्रिया...शुक्रिया...

   मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.

      नोव्हेंबर २०१६.

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