कल रात
सपने में अचानक
वो आयी
खुश देखकर
उसे मै कुछ
समझ न पायी
बदल रहा
है अब रुप
और रंग मेरा
गुलाबी गुलाबी निखर
रहा है रुप
मेरा
वहीं वहीं
रंग और रुप
की दुनिया में
काला धन
मुझे बनाकर छुपाया
है
कई महाधनों
ने, बुरे बुरे,
काले इरादोंने
गुप्त किया है
मुझे घर के
किसी कोने में
आज बाहर
निकलेगा वो सारा
काला धन
जिन्होने उसे छुपाया
है बंद तिजोरीयों
में
पाँच सौ
और हजार की
वो नोट थी
जो कल
रात मुझे सपने
में दिखी थी
उसके साथ
वो एक बडे़
अमीर को लायी
जिसने अपनी पूरी
जिंदगी
काला धन
कमाने में लगायी
बोल रही
थी उसके साथ
पाँच सौ
और हजार की
पुरानी नोट
बोली वो
अब बात मेरी
सुन तू
बात मेरी
अब मान ले
तू
जिन्होने कमाया मुझे
सच्चाई और
ईमानदारी से, मेहनत
का पसीना बहाया
खूब अच्छा
काम करके मुझे
कमाया
उन सभी
को आज मैने
शांत नींद में
पाया
देखते है मेरा
नया रुप क्या
क्या
रंग लायेगा,
क्या क्या रुप
दिखायेगा
सुना है
मैने ये की
जब दो हजार
के
नये रुप
में मै जब
आऊँगी
satellite signal
द्वारा काला धन
सबके सामने
लाऊँगी
अच्छे अच्छों की
बोलती अब मै
बंद करुँगी
सच्चाई के साथ
हमेशा अब मैं
चलना
और बोलना
पसंद करुँगी
मोदी का
निर्णय अब क्या
कमाल लाया
सारे भारत
ने आज मेरा
ही विचार किया
बोली पुरानी
नोट फिरसे उस
अमीर
आदमी से;
लक्ष्मी का रुप
हूँ मै
मेरा हमेशा
स्वागत कर
अच्छाई के पथ
पर चलकर
बुराईयों का विनाश
कर
जो हो
गया सो हो
गया
अब नये
रुप में मेरा
स्वागत कर
छोड दे
अब ये कालापन
छोड दे
अब ये बेईमानी
इतना कहा
जब नोट ने
सपना मेरा
टूट गया
मन ही
मन में लगा
आज ये
सूरज भी
कुछ अलग नजर
आया
पुरानी नोटों को
आज दिल से
हमेशा के लिए,
मुस्कुराहट के साथ
Bye.....Bye... किया
दिल थामकर
कहा उनसे
कभी साथ
दिया बहुत आपने
इसलिए... शुक्रिया...शुक्रिया...
मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.
९ नोव्हेंबर
२०१६.
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