Tuesday, 11 October 2016

विजय

आसानी से नहीं मिलता विजय
   शहंशाह होता है ये सारी मेहनतों का
   साथ देता ये जुझनेवालोंका
   साथ देता ये हिम्मतवालोंका
   साथ देता ये जमीन पर रहनेवालोंका
   तपस्या करनी पडती इसे पाने के लिए
    
   विजय तो होता ही है
   हर किसोको आजमाने के लिए
    खुद की मेहनत पर भरोसा           
रखनेवालोंके पास रहता विजय
   आज नहीं तो कल सही ये
   मन में विश्वास दिलाता विजय

     कभी कभी लगता कर लेंगे
       इसे हम मुठ्ठी में कैद
    सामने ही तो दिख रही जीत
    नजर के सामने ही तो है विजय
   पर फँसाके हमें निकल जाता यूँ
    जैसे उसका और हमारा
      कोई वास्ता नहीं
    उसका और हमारा कोई रिश्ता नहीं
     अचानक ही बैठ जाता वो
       दुसरों की मुठ्ठी में
     और हँसता, आँख दिखाता
      वो हमें, चाल चलता हमसे नयी

      कभी किसीके मेहनत की जब
      परिसीमा होती; फिर भी नहीं
      मिलता विजय; फिर भी नहीं
         मिलता विजय
      और किसीके हार में भी
        मिलता विजय
      किसीके हार में भी दिखता विजय
      बडा ही अजीब होता है ये विजय
      बडा ही अजीब होता है ये विजय

   मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.
     ११ अॉक्टोबर २०१६.


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