आसानी से नहीं
मिलता विजय
शहंशाह होता है
ये सारी मेहनतों
का
साथ देता
ये जुझनेवालोंका
साथ देता
ये हिम्मतवालोंका
साथ देता
ये जमीन पर
रहनेवालोंका
तपस्या करनी पडती
इसे पाने के
लिए
विजय तो
होता ही है
हर किसोको
आजमाने के लिए
खुद की
मेहनत पर भरोसा
रखनेवालोंके
पास रहता विजय
आज नहीं
तो कल सही
ये
मन में
विश्वास दिलाता विजय
कभी कभी
लगता कर लेंगे
इसे हम
मुठ्ठी में कैद
सामने ही तो
दिख रही जीत
नजर के
सामने ही तो
है विजय
पर फँसाके
हमें निकल जाता
यूँ
जैसे उसका
और हमारा
कोई वास्ता
नहीं
उसका और
हमारा कोई रिश्ता
नहीं
अचानक ही बैठ
जाता वो
दुसरों की मुठ्ठी
में
और हँसता,
आँख दिखाता
वो हमें,
चाल चलता हमसे
नयी
कभी किसीके
मेहनत की जब
परिसीमा होती; फिर
भी नहीं
मिलता विजय; फिर
भी नहीं
मिलता विजय
और किसीके
हार में भी
मिलता विजय
किसीके हार में
भी दिखता विजय
बडा ही
अजीब होता है
ये विजय
बडा ही
अजीब होता है
ये विजय
मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.
११ अॉक्टोबर
२०१६.
No comments:
Post a Comment