Sunday, 16 October 2016

घर

जहाँ मिलता है चैन और सुकून
   जहाँ मिलता है सच्चा प्यार
   जहाँ होता है माँ, बाप के सपनों का जहाँ
   जहाँ होता है बहन, भाई के प्रेम का साथ
   जहाँ रहते है सब एकता के साथ
   जहाँ रहते है सब साथ साथ

  जहाँ की दीवारें रंगी होती है कई यादों से  जहाँ का आंगन खिलता है हंसी मजाक से
  जहाँ के हर कोने में जान होती है अपनी
  जहाँ का हर कमरा दिखाता है
   अपने अस्तित्व की कहानी
   छोड जाता है हर दिल पे, हमेशा के लिए
   प्यार, मुहाब्बत, जिम्मेदारी की निशानी

   जहाँ मन को छोड देते है हम खुला
   चाहे कितना भी घाव हो गहरा
  जहाँ हर दिन आता है लेकर नयी आशा
    बाँधके उम्मीदों का सेहरा
    जहाँ जुडते है मन से मन
   जहाँ मिलते है विचार से विचार
   जहाँ मिलती है भावनाओंसे भावना
  चाहे कितनी भी दुनिया घूम के आओ
मन में रहती ही है उससे मिलने की कामना
धूप से खिली, झूठ से सजी, गद्दारी से भरी,
    फरेब से भरी इस दुनिया में       
     तेरे दामन में ही है छाँव ना
     तेरे दामन में ही है छाँव ना
        तू ही तो है मेरा घर
        तू ही तो है मेरा घर
    यही कहता मन ये सच्ची बात ना
      है ना, है ना, है की ना???......!!

    मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.

     १६ अॉक्टोबर २०१६.

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