जो रुकता
नहीं किसी के
लिए
जो झुकता
नहीं किसी के
लिए
वो समय
होता है
वो समय
होता है
जो मानेगा,
समझेगा समय की
पाबंदी
वही चमकेगा
और छूएगा अस्मानी
बुलंदी
हर कोई
जीता समय के
सीमा में
हर कोई
रहता समय के
परिक्षेत्र में
हर कोई
मानता समय की
गुलामी
हर कोई
देता समय को
सलामी
समय समयपर समय दिखाता
कहानी नई
समय बीतता
है......बीतते है युग
कई
समय के
साथ बदलते है
रिश्ते कई
समय के
साथ भरते है
जख्म कई
एक समय
में होती है
जीत
एक समय
में होती है
हार
समय समय
की बात भी
अलग
आज जो
लगते अपनें; कल
लगते पराये
आज जो
लगते वादे सच्चे
आज जो
लगती सच्ची कसमें
आज जो
लगते सच्चे सपने
कल वो
बनते बेगाने से
साये
समय की
धारा में बहता
हर कोई
जीत जाओ
तो समय साथ
रहता
हार जाओ
तो समय खराब
रहता
समय का
तीर ऐसे चलता
हर किसी
पे निशाना लगता
समय का
निशाना सही होता
नहीं कभी
कहीं चुकता
समय के
साथ बदलना भी
पडता
वरना आदमी
पीछे रह जाता
समय की
कीमत तू जान
ले
अपने काम
समय पे कर
ले
समय फिसलता
है हाथों से
रेत की तरह
समय में
समा जा तू
पूरी तरह
तभी पूरी
होगी तेरी जिंदगी
की वजह
तभी पूरी
होगी तेरी जिंदगी
की वजह
जो रुकता
नहीं किसी के
लिए
जो झुकता
नहीं किसी के
लिए
वो समय
होता है
वो समय
होता है
मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.
१७/१०/२०१६.
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