Thursday, 6 October 2016

जय सरस्वती

    तू लेखणीत
    तू कवितेत
    तू ज्ञानात
   तू साहित्यात
   जय सरस्वती
   जय सरस्वती

  तू गायनात
  तू संगीतात
  तू वादनात
  तू विद्येत
   जय सरस्वती
   जय सरस्वती

   तू वाणीत
   तू शब्दात
   तू नादात
   तू तालात
   जय सरस्वती
   जय सरस्वती

   तू सद् भावनेत
   तू शांततेत
   तू निरागसतेत
   तू कलेत
   जय सरस्वती
   जय सरस्वती

   तू बुध्दीत
   तू प्रतिभेत
   तू ऊर्जेत
   तू शक्तीत
   जय सरस्वती
   जय सरस्वती

   तू वसंतातली बहार
   तव प्रसन्न रुप सुंदर
  आवडसी मजसी तू फार
   नामे तू वासंती
   जय सरस्वती
   जय सरस्वती

   तव सेवा घडावी
   लेखणी व्हावी तत्पर
    शब्द सापडो
    शब्द जुळो
   तूच द्यावी मती
   जय सरस्वती
   जय सरस्वती

   साहित्य वरदायी तू
   ज्ञान सुखदायी तू
  वीणेतील झंकार तू
 प्रसन्न तुला करण्या
   गुणगान सारे गाती
   जय सरस्वती
   जय सरस्वती

  डोलती तुजसमोर मोर
  डोलती तव नादे अंबर
  पसरो ज्ञानप्रेरणा सर्वदूर
  तव कृपे नाचो मम मनमोर
  साहित्य पिसारा फुलो जगभर
  निवासी राहा तू सदैव मम चित्ती
   जय सरस्वती
   जय सरस्वती

   मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.

      ६ अॉक्टोबर २०१६.

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