Sunday, 16 October 2016

तूने मुझे पहचाना नहीं

तूने मुझे पहचाना नहीं
   मै हूँ खेत खलिहानों में
   मै हूँ मिट्टी की खुशबू में
   मै हूँ कडी मेहनत में
   देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
    अब तक देखा नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं

    मै हूँ फुलों के खिलने मे
    मै हूँ पेड, पौधों में
    मै हूँ हरियाली में
   मै हूँ सूरज और चाँद में
  देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
    अब तक देखा नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं

     मै हूँ सुबह की ताजा किरणों में
     मै हूँ रात की गहिरी खामोशी में
     मै हूँ अंधेरे के बाद आनेवाले
     दिन के उजालों में
    देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
    अब तक देखा नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं

     मै हूँ ज्ञान के भंडार में
     मै हूँ डंटके मुकाबला करनेवालों में
     मै हूँ शक्तीशाली शरीर और
        सच्चे दिलों में
   देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
    अब तक देखा नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं

     मै हूँ प्यार की सच्ची दास्ताँ में
     मै हूँ नफ्रत की टूटती दिवार में
      मै हूँ तुझमें और तेरे माँ, बाप में
    देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
     अब तक देखा नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं

    मै हूँ तेरे रग रग में
    दौडता खून बनकर
    मै हूँ समाया समय में
    कालचक्र की कालगती में
    देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
    अब तक देखा नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं

     मै हूँ महान हस्तियों में
     मै हूँ गांधी के तत्वों में
     मै हूँ बुध्द के विचारों में
    मै हूँ विवेकानंद के विवेक में
    मै हूँ शिवाजी के पराक्रम में
    देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
    अब तक देखा नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं

     मै हूँ रिश्तों की मिठास में
     मै हूँ त्याग और बलिदान में
     मै हूँ तेरे जिद और जुनून में
     देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
    अब तक देखा नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं

     मै हूँ भगवान
     मै हूँ ईश्वर, मै हूँ अल्ला,
     मै हूँ  साई, मै हूँ ईसा मसीह
     सबकुछ मै ही मै हूँ
    इस धरती पर बनाये स्वर्ग में
     देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
     अब तक देखा नहीं
     तूने मुझे पहचाना नहीं
     तूने मुझे पहचाना नहीं

     मै हूँ गीता, बायबल और कुराण में
     मै रहता खुश हमेशा इन्सानियत में
     तुझमें बसा है मेरा ही अंश
     इस अंश को तू बना अपनी ताकत
      दिये जला ज्ञान के
      दिये जला प्यार के
     मिटा ले रिश्तों की दूरी
     निराशा भरी, दुःख भरी इस दुनिया में
  रंग भर तू सच्चाई, लगन और मेहनत के
     बना ले इस दुनिया को तू खूबसूरत
     डालके ये रंगोली, डालके ये रंगोली
     कर ले ये संकल्प तू इस दिवाली
     कर ले ये संकल्प तू इस दिवाली
     देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
     अब तक देखा नहीं
      तूने मुझे पहचाना नहीं
      तूने मुझे पहचाना नहीं

       तेरा स्वर्ग है यहीं
      मै हूँ तेरे साथ यहीं
      पहचान मुझे
     मान ले मेरा कहना
    तू ही है, तू ही है, इंसान
     इस धरती का गहना
    देखा तो मुझे तूने; लेकिन लगता है
    अब तक देखा नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं
    तूने मुझे पहचाना नहीं
     
   मृदुला मुकुंद पाटखेडकर.

     १६ अॉक्टोबर २०१६.

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